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Wednesday, 8 May 2013





परिवर्तन -1

पहले किसी आदमी को
अकेली जाती लडकी दिख जाती थी
तो वो पूछ्ता था-
कहाँ जाओगी बहन?

फिर एक समय ऐसा भी आया
जब वो पूछ्ने लगा-
कहाँ जाओगी मेरी जान?

पर अब तो वो समय आ गया है
कि वो उससे कुछ नहीं पूछता
बस, बलपूर्वक उसे साथ ले जाता है
और फिर कुछ ही देर में
उसके ज़िस्मों-दिमाग पर
अपनी क्रूरता के कुछ निशान
और कुछ जख़्म 
हमेशा-हमेशा के लिये छोड़ जाता है

हमारे असभ्य से सभ्य होने की
बस यही कहानी है:
नारी आज़ भी अबला है 
आज़ भी उसके आँचल में दूध
और आँखों में पानी है...

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