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Tuesday, 14 January 2014

ऐसी हो प्रार्थना



जब कभी भी
हम ईश्वर से
करें प्रार्थना
तो उसमें हो
उसके प्रति
हमारा आभार
कि उसने दिया हमें
मानव योनि में जन्म
और दिया हमें
अच्छा स्वास्थ्य
अच्छा परिवार
और पढ़ने-लिखने
का सुअवसर
और भी हम
कहें जो कुछ
धन्यवाद और
अहोभाव में ही
भींगे हों हमारे स्वर
क्योंकि 
शिकायतों से
भरी प्रार्थना
प्रार्थना नहीं
          शिकायत ही होती है 

4 comments:

  1. काफी उम्दा रचना....बधाई...
    नयी रचना
    "जिंदगी की पतंग"
    आभार

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  2. कविगुरु रविंद्रनाथ ठाकुर ने भी ऐसा प्रार्थना किया .उसका भावार्थ है ........हे ईश्वर तुमने बिना मांगे ही जो कुछ मुझे दिया है उसके आगे मैं क्या मांगूं ---तुम ने मुझे यह आकाश दिया है, यह उजाला दिया है तन ,मन ,प्राण दिया है और जो महादान तुम मुझे देने वाले हो उसके लिए तुम मुझे प्रतिदिन प्रतिपल लायक (योग्य ) बना रहे हो ,मैं और क्या मांगू ?
    मकर संक्रान्ति की शुभकामनाएं !
    नई पोस्ट हम तुम.....,पानी का बूंद !
    नई पोस्ट बोलती तस्वीरें !

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बुधवार (15-01-2014) को हरिश्चंद का पूत, किन्तु अनुभव का टोटा; चर्चा मंच 1493 में "मयंक का कोना" पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    मकर संक्रान्ति (उत्तरायणी) की शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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