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Wednesday, 15 January 2014

दीप बन के जलूँ



दीप बन के जलूँ






पूजा-अर्चना
मन को करें शुद्ध
दें नयी शक्ति
        ***
बनूँ तो बनूँ
आरती का दीपक
तेरे थाल में
       ***
बन के दीप
जलूँ तेरे मन में
यही कामना
       ***

5 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बृहस्पतिवार (16-01-2014) को "फिसल गया वक्‍त" चर्चा - 1494 में "मयंक का कोना" पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. बहुत सुन्दर हाइकु !

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  3. आप सभी का तहे दिल से आभार!

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