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Thursday, 16 January 2014

रख विश्वाश



रख विश्वाश




नया आकाश
नयी संभावनाएं
नयी उड़ान
       ***
बनो सशक्त
लो मुट्ठी में आकाश
खूँदो जहान
       ***
रख विश्वाश
हौंसलों में उड़ान
छू ले आकाश

       ***

2 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज शुक्रवार (17-01-2014) को "सपनों को मत रोको" (चर्चा मंच-1495) में "मयंक का कोना" पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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