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Thursday, 22 August 2013

यह कैसा मखौल?


हर तरफ़ मारा-मारी
दब-दब कर
घुट-घुट कर
जीने की लाचारी
हर चीज़ के रोज बढ़ते दाम
कमरतोड़ महंगाई
भ्रष्टाचार और घोटालों की
ये कैसी बाढ़ आई
कुछ विशेष तो जेड सिक्यूरिटी में
पर आम आदमी के लिए  
असुरक्षा, अराज़कता
और भय का माहौल
आज़ादी के नाम पर
यह कैसा मखौल?

3 comments:

  1. बहुत सुन्दर और सटीक अभिव्यक्ति...

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल शुक्रवार (23-08-2013) को "ईश्वर तू ऐसा क्यों करता है" (शुक्रवारीय चर्चामंचःअंक-1346) पर भी होगी!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. सच ही कहा आपने, यह मखौल ही तो है.

    रामराम.

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