हमारे लिए ऊर्जा के परम-स्रोत...

Saturday, 29 June 2013

लाइटहाउस



बस्ती से दूर
कहीं एकांत में
कोलाहल भरे
वातावरण से दूर
कहीं निर्जन
और शांत में
अंधेरे को चाटता
रात भर
अपनी जीभ
लपलपाता हूँ
मैं ही आपको
आपका गंतव्य
बताता हूँ

मैं लाइटहाउस हूँ
औरों को
रास्ता दिखाता हूँ ∙  

1 comment:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा आज रविवार (30-06-2013) को "आज बहुत है शोक" : चर्चा मंच 1292 में "मयंक का कोना" पर भी है!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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