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Monday, 10 February 2014

सुप्रभात :-))






सब हृदय से तेरे आभारी हैं ओ मेरे भगवान
हर रोज सुबह के रूप में तू जो देता है वरदान.....


सुप्रभात :-))

 
चित्र गूगल से साभार 

7 comments:

  1. There is no reason to distrust existence of God, no limit to believe him, only difference is the form of God .....Nirvikaar or saakaar ......God is great .

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (11-02-2014) को "साथी व्यस्त हैं तो क्या हुआ?" (चर्चा मंच-1520) पर भी होगी!
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    बसंतपंचमी की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. चर्चा मंच में स्थान देने हेतु आपका हार्दिक आभार:-))

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  3. बिलकुल सही ...
    सुन्दर भाव!

    ~सादर

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