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Tuesday, 4 June 2013

योगदान


हम अकेले कुछ नहीं कर सकते
कितनी ही उपलब्धियाँ
जुड़ जाए हमारे नाम के साथ
पर सच तो यही है
कि उनमें होता है
ना जाने कितनों का ही
महत्त्वपूर्ण योगदान
जिनके नाम कभी नहीं लिए जाते
और शायद हम भी नहीं करते
कभी उन पर ग़ौर
और बिसरा देते हैं उन्हें
पर यदि गहरे में सोचें
तो पाएंगे कि एक छोटी से छोटी उपलब्धि में
छिपे होते हैं अनेकानेक नाम
कितने ही परिचितों/अपरिचितों के
जो जाने/अनजाने जुड जाते हैं
हमारे उस उपक्रम में

अकेले कुछ नहीं होता!
हम अकेले कुछ नहीं कर सकते!!                    
  

3 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल बुधवार (05-06-2013) के "योगदान" चर्चा मंचःअंक-1266 पर भी होगी!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. योगदान करने के लिये खुला मन होना चाहिये
    जिंदादिल होना चाहिये
    विचारणीय रचना
    सादर

    आग्रह है
    गुलमोहर------

    ReplyDelete

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