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Monday, 5 August 2013

माँ.


पूरी  वो  करती   रहे  दिन भर  सबकी बात,
सदा ही  वो  खटती रहे  दिन होवे  या  रात!

सुबह  से लेकर रात तक तनिक चैन ना  पाय,
माँ   तो मानो हो गयी  बस सेवा  का  पर्याय!

जब  भी  मुझको आती  है गोबर की कहीं गंध,
उसमें छिपी दिखती है सदा माँ की मुझे सुगंध!

माँ  के  जैसा  गुरु  कहाँ  माँ  के  जैसा  प्यार,
माँ  के  चरणों  ही  तले  बसे  स्वर्ग  का  द्वार!

5 comments:

  1. सुन्दर दोहे ... माँ की स्मृति लिए ... मधुर एहसास लिए ...
    माँ के चरणों में स्वर्ग होता है ...

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  2. मां ऐसी ही होती है, बहुत ही सुंदर.

    रामराम.

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  3. आपकी यह रचना कल मंगलवार (06-08-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

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  4. माँ को सम्मान देने वाले लोगों से मिलना अच्छा लगता है !

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  5. सुन्दर ,सटीक और प्रभाबशाली रचना। कभी यहाँ भी पधारें।
    सादर मदन
    http://saxenamadanmohan1969.blogspot.in/
    http://saxenamadanmohan.blogspot.in/

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